सुनों
तुम्हें यूँ देखना
और देखते ही रहना
आँखों के रास्ते
दिल में उतार लेने का
कोई इरादा ना था

खुद को बेकरार करने का
बिन अल्फाज़ इक़रार का
कोई इरादा ना था

कोई इरादा ना था
आम को ख़ास बनाने का
कोई इरादा ना था दूरियों में
तन्हाई को लुभाने का
रुसवाई  में अश्क़ बहाने का

तुम्हारे आँखों में खो जाने का
तुम्हारे बाहों में सो जाने का
कोई इरादा ना था
तुम्हें अपना बनाने का
कोई इरादा ना था

-अंकित आनंद