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सोच सेगमेंट-आकाश सिकरवार

मुफलिसी के दिन संघर्ष में ही सही,पर कटते जरूर हैं,आकाश में बादल कितने भी सहीपर छंटते जरूर हैं,अपने जफ़र पर इतना ना इतरा ए जिंदगीजमीं पर रहकर आसमान में उड़ने…

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खाताबही

मार्च बीतने से पहले बहुत से हिसाब किताब क्लियर कर लिए हैं । इस अप्रैल से उम्मीदों की नई खाताबही में रिश्तों की उधारी नही करूंगा । - केतन अग्रवाल

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