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सुकून

गिर सकता नहीं कोई,
किसी के गिराने से
सुकून छीन नहीं सकता
कोई मेरे सिरहाने से

मैं हवा हूँ,
जो तेरे आगोश से निकलता जाऊंगा
मैं सूखे पत्तों पर,
बारिशों सा आ जाऊंगा
मैं तबाह कर जाऊंगा,
सारी बेमानी रिवायतों को
मैं फूलों से आऊंगा,
तुझमें खिल जाऊंगा

के अब रख नहीं सकता
कोई मुझे, इतने वीराने से
सुकून छीन नहीं सकता
कोई मेरे सिरहाने से

– मोहित सक्सेना