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काश

काश, आज तुम जिंदा होती
कहती बिटिया प्यारी अम्मा
सबसे निराली मेरी मम्मा
यह देख तुम कितना खुश होती
काश! आज तुम जिंदा होती

स्कूल से आती किस्से सुनाती
मीठी बातों से तुम्हें खूब हंसाती
सारी खुशियां तेरी होती
काश! आज तुम जिंदा होती

आता हूं दफ्तर से जब मैं
आती वो है प्यारी सी मुस्कान लिए
हाथों में पानी का ग्लास
आँखों में चंद सवाल लिए
अपनी पसंद का चीज देख
वो ऐसे खुश होती
काश! आज तुम जिंदा होती

जब मैं पढ़ने को हूं बैठता अखबार
करती मुझसे वह बार-बार सवाल
पापा मेरे मुझे बताओ
मम्मी मेरी कहां गई
देते क्यों ना जवाब?
मेरी आंखों में आंसू देख वो
खुद रोने को होती
काश! आज तुम जिंदा होती

चंदा मामा से पूछो जाकर
छुपते हैं क्यों घबरा कर
वो मेरी मम्मी को ला देंगे
तो मैं भी सुनूंगी लोरी
काश! आज तुम जिंदा होती…

– अनमना झा