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II अपनी भाषा , अपना मंच II

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कलेवर

कालाघर

एक ऐसी जगह जहां काला रंग श्रेष्ठता का प्रतीक है,जहां काले रंग की महिलाओं के लिए पुरूष तरसते है। जहां मुझ अभागे को इसीलिए संगनी नहीं मिली क्योंकि इनके पैमाने पर मेरे बदन का रंग गेरुआ है, दूसरी नजर में… Continue Reading →

बस टू पटना

बस टू पटना…? दसमा का रिजल्ट आया है. फर्स्ट डिविजन आए हैं हम. पटना जाने का तैयारी चल रहा है हमारा. आगे साइंस लिए हैं ना. साइंस वाला सब के लिए पटना मक्का-मदीना है. वहां जाना ज़रूरी होता है. बिना… Continue Reading →

बाज़ार | 1

का बात है बेटा, दू दिन से रात में खाना खाये नहीं आत हो, कौनो दूसर जगह जाए लगे हो का…? अरे नहीं आंटी, आपके अलावे कहां जाएंगे। इस शहर में बस आप ही के पास तो थोड़ा अपनापन का… Continue Reading →

बाज़ार | 2

देख बेटा, इ बाजार है। इहां जेतना टारगेट पूरा करोगे न ओतने ज्यादा मिलता जाएगा। बस काम से मतलब है इहां सबको। तुम खाओ या मत खाओ इ से केकरो फर्क पड़े वाला नहीं है… पर तुमको तो कम से… Continue Reading →

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