कुछ-कुछ कभी-कभी

एक दिन गुस्से से भरकर मैंने पूछा उनसे, महसूस होता है कुछ की नहीं, वो झट से बोले होता है ना कुछ-कुछ, कहीं-कहीं, दूसरा सवाल झुंझला के पूछा मैंने, प्यार…

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