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ग़ज़ल

इश्क़ में बे-करारी इस कदर रही है
आग जितनी इधर उतनी उधर रही है ।

कोचिंग के बाद चाय का वादा था
हँसते हँसते अब वो मुकर रही है ।

चाँद तो उसकी तस्वीरें लेने बैठा है
पगली है कि घंटों से संवर रही है ।

उसने ठानी है मेरा कत्ल करने की
सो वो आँखों में काजल भर रही है ।

पुष्पेंद्र सिंह