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मोहब्बत की गुल्लक

फूट कर रोई थी वो 
किसी छोटी बच्ची सी,

जब ठोकर लगके हाथ से
मोहब्बत की गुल्लक टूटी

ज़मीन पर बिल्कुल
उसकी जूती से लगकर
बिख़रा पड़ा था

कुछ चिल्लर सा इश्क़
और कसमें उन नोटों सी
जो अब चलते ही नहीं ।।

– अनुजा श्रीवास्तव