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हकदार

हकदार

एक रोज जब मैं मर जाऊँगा,
मेरी मौत के बाद जब मुझसे सवाल किए जाएँगे,
मेरे अच्छाइयों और बुराइयों के,
मेरे पाप और पुण्य के,
मेरे गुनाह मुझे गिनाए जाएँगे
और फिर मेरे कर्मों का लेखा जोखा करने के बाद
जब मुझसे पूछा जाएगा,
कोई ऐसा काम बता सकते हो,
जिससे कि तुम्हारे सारे गुनाह माफ कर दिए जाएँ
और दोज़ख़ की बजाय तुम्हें जन्नत भेजा जाए ।

उस वक़्त मैं तुम्हारे चेहरे को याद करूँगा
और फिर बेझिझक मुस्कुराकर तुम्हारा नाम लेकर कह दूँगा कि
तुम्हारी मोहब्बत मिली है मुझको,
मै प्रेमी हूँ तुम्हारा,
मैँने तुमसे इश्क़ किया है।

और यही सबसे बड़ी वजह होगी
मेरे गुनाहों के माफ होने की,
मेरे स्वर्ग के हकदार होने की।

– राघव शंकर

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