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अंदाज-ए-जिंदगी

मेरे आज को मेरे कल सेमत टटोलोहाथों की लकीरों परहम कई पर्दे गिराएबैठे हैं।रोज़ बनते रोज़ बिगड़ते हैंमिट्टी में मिलकरभी नज़रों को कुंदन बनाए बैठे हैं।भले या बुरे की परवाह…

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तुम चलना साथ मेरे

झींगुरों के स्वरों के साथ जागतेचाँद के उगने सेकलरवों की ध्वनि से मोटरों के पों पों तकतुम चलना साथ मेरे। चार चम्मच चीनी की मिठास से भरेगरमागरम चुस्की सेचीनी मुक्त…

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