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तुम्हारे जाने के बाद

तुम्हारे जाने के बाद

वो एक हंसी
जो तुम सँग हंसी थी
तुम्हारे जाने के बाद
फिर वैसा कभी हंस नहीं पाई

वो एक ख़्वाब जो
तुम्हारे कंधे पे
सर रख के देखा था
वो ख़्वाब फिर कभी
आंखों की राह से
गुज़रा नहीं

फिर उँगलियों ने कभी
किसी चेहरे के नक्श
छूने की ज़िद नहीं की
समझदार हो गयीं थीं
तुम्हारे जाने के बाद

वैसे लगता यही था कि
कुछ भी नहीं बदला
तुम्हारे जाने के बाद

  • पुष्पिंदर चागती भंडारी

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