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साहित्यऔरकलाकासंगम

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विरासत

हमारे कालजयी कवि

भारतीय काव्य परंपरा

भक्ति काल

मैया! मोहि दाऊ बहुत खिझायो।

मोसों कहत, तू कहाँ गयो?

काहे नाइन आँसू ढरकायो?

महाकवि

सूरदास

01
नीति काव्य

रहिमन धागा प्रेम का,

मत तोड़ो चटकाय।

टूटे से फिर ना जुड़े,

जुड़े गाँठ पड़ जाय॥

महाकवि

रहीम

02
निर्गुण धारा

बुरा जो देखन मैं चला,

बुरा न मिलिया कोय।

जो दिल खोजा आपना,

मुझसे बुरा न कोय।

महाकवि

कबीर

03

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